केतार:प्रखंड क्षेत्र के मुकुंदपुर गांव में चल रहे श्री दुर्गा नौचंडी पाठ एवं संगीतमय श्री राम कथा के चौथे दिन कथा का माहौल पूरी तरह से दिव्य और आनंदमय हो गया।कथा के चतुर्थ दिवस पर गुप्तकाशी से पधारे प्रख्यात कथा व्यास आचार्य श्री सौरभ भारद्वाज ने भगवान श्रीराम के जन्म की अलौकिक कथा सुनाई।जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।कथा के दौरान पूरा पंडाल राजा दशरथ के यहाँ पुत्रोत्सव की उमंग में डूबा नजर आया।कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए आचार्य सौरभ भारद्वाज ने मानस की प्रसिद्ध चौपाई “एक बार भूपति मन माही। भयउ गलानी मोरे सूत नाहीं।।”
का सविस्तार वर्णन किया।उन्होंने बताया कि चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ के मन में एक समय अपार कष्ट और गलानी उत्पन्न हुई कि उनके पास कोई संतान नहीं है। इस पीड़ा के निवारण हेतु वे गुरु वशिष्ठ के आश्रम पहुँचे। आचार्य जी ने विशेष बल देते हुए कहा कि राजा दशरथ को एक नहीं,बल्कि गुरुदेव भगवान की असीम कृपा से चार प्रतापी पुत्र श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के रूप में रत्न प्राप्त हुए।
संसार में माता-पिता और गुरु ही दिखाते हैं सही राह
आचार्य जी ने श्रोताओं को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में गुरु की कृपा सबसे सर्वोपरि है।इस संसार में माता-पिता और गुरु ही ऐसे मार्गदर्शक हैं, जो मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर सच्चा और कल्याणकारी रास्ता दिखाते हैं। इनके बिना जीवन की सार्थकता संभव नहीं है।श्री राम जन्म की कथा के प्रसंग के आते ही पंडाल में बधाइयां गूंज उठीं। “ललना खेलन जात बाड़ें…” और अन्य पारंपरिक सोहर तथा बधाई गीतों की धुनों पर उपस्थित श्रद्धालु भक्त झूम उठे। महिलाओं ने पारंपरिक नृत्य के साथ भगवान के प्रगट होने की खुशियां मनाईं। कथा के दौरान आचार्य जी के ओजस्वी वचनों और संगीतमय प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस आयोजन से पूरे क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह से राममय और भक्तिमय हो गया है, जिसमें बड़ी संख्या में दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

