श्री बंशीधर नगर:स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर में शिशु वाटिका के भैया -बहनों ने प्रथम कालांश में सुसज्जित तरणताल में पानी के फव्वारे के बीच उछल-कूद करते हुए खूब मस्ती की।इस अवसर पर प्रधानाचार्य रविकांत पाठक ने कहा कि शिशु वाटिका शैक्षिक व्यवस्था के 12 आयामों में तरणताल एक प्रमुख आयाम है। पानी में खेलने से छोटे भैया-बहनों का खेलकूद,संगीत व नृत्य के प्रति रुचि बढ़ती है। दीदी जी के मार्गदर्शन में भैया-बहन पानी के छींटें फेंककर,कभी दौड़कर तो कभी गीत गुनगुनाकर आनन्दित हो रहे थें।बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए हमारा विद्यालय हमेशा प्रतिबद्ध रहा है और यहां शिशु वाटिका में पूर्णत: गतिविधि के माध्यम से बच्चे स्वयं करके सीखते हैं। वहीं,वाटिका प्रमुख आचार्या नीति कुमारी ने कहा कि शिशु वाटिका के सभी आयामों की यहां विधिवत व्यवस्था है। पूर्व सूचना अनुसार तरणताल गतिविधि के लिए भैया-बहन घर के वेश में आए थे एवं इस हेतु भैया-बहनों में एक अलग उत्साह था।अपने विद्यालय में छोटे भैया-बहनों के लिए चित्र पुस्तकालय,कला शाला, क्रीड़ांगन , विज्ञान प्रयोगशाला, रंगमंच, वस्तु संग्रहालय तथा उद्यान आदि हैं।इन व्यवस्थाओं से बच्चे खेलों के माध्यम से सीखते हैं। इस तरणताल गतिविधि को सफल बनाने में आचार्या आरती श्रीवास्तव,सुप्रिया कुमारी, खुशबू सिंघल,रेणु पाठक,पूर्णिमा कुमारी,सलोनी कुमारी, तन्वी जोशी,अनामिका कुमारी,अदिति कुमारी की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।

