दुकानदारों ने उधार देने से किया इनकार, प्रधानाध्यापक अपनी जेब से चला रहे व्यवस्था; सितंबर तक भुगतान नहीं हुआ तो MDM बंद करने की चेतावनी
विशुनपुरा प्रखंड के 28 विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना (MDM) की राशि समय पर नहीं मिलने से व्यवस्था गंभीर संकट में पहुंच गई है। प्रधानाध्यापकों के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अप्रैल माह से ही मध्याह्न भोजन मद की राशि का भुगतान नहीं हुआ है। कई माह से राशि लंबित रहने के कारण विद्यालयों के MDM खाते माइनस में चल रहे हैं।
प्रधानाध्यापकों का कहना है कि अब स्थानीय दुकानदार भी उधार में राशन-सामग्री देने से इनकार करने लगे हैं। गैस, सब्जी और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने के लिए कई प्रधानाध्यापकों को अपनी जेब से भुगतान करना पड़ रहा है। इससे उन पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
तीन माह से मिल रहा सिर्फ आश्वासन
प्रधानाध्यापकों के अनुसार पिछले करीब तीन माह से विभाग की ओर से राशि भेजे जाने का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ है। दूसरी ओर, मध्याह्न भोजन बंद होने पर विभागीय कार्रवाई की चिंता के कारण प्रधानाध्यापक निजी पैसे लगाकर बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था बनाए हुए हैं।
प्रधानाध्यापकों का कहना है कि लगातार निजी राशि खर्च करना अब संभव नहीं है। दुकानदारों का बकाया बढ़ता जा रहा है और यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो भोजन व्यवस्था जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
कई विद्यालयों में लाखों रुपये का बकाया
प्रधानाध्यापकों के अनुसार कई विद्यालयों में MDM मद की बड़ी राशि लंबित है। पीएम श्री अमहर विद्यालय में करीब 2.50 लाख रुपये, +2 पिपरीकला में करीब 3.50 लाख रुपये, जीएमएस विशुनपुरा में करीब 2 लाख रुपये, अंबेडकर नगर में करीब 35 हजार रुपये, यूपीएस महुली खुर्द में करीब 45 हजार रुपये, एनपीएस टांडीपर में करीब 30 हजार रुपये, यूएमएस ओढ़ेया में करीब 70 हजार रुपये तथा यूएमएस सरांग में करीब 72 हजार रुपये की राशि लंबित बताई जा रही है।
प्रधानाध्यापकों के अनुसार अन्य विद्यालयों में भी MDM मद की राशि माइनस में चल रही है।
सितंबर तक इंतजार, फिर MDM बंद करने की चेतावनी
मामले को लेकर प्रखंड के प्रधानाध्यापकों ने आपस में निर्णय लिया है कि सितंबर माह तक राशि आने का इंतजार किया जाएगा। यदि इस अवधि तक भुगतान नहीं हुआ तो विभाग को लिखित सूचना देकर मध्याह्न भोजन योजना बंद करने का निर्णय लिया जाएगा।
प्रधानाध्यापकों का कहना है कि बच्चों को भोजन उपलब्ध कराना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन लगातार निजी धन खर्च करना संभव नहीं है। राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण यदि MDM बंद करने की स्थिति आती है तो इसकी जवाबदेही संबंधित विभाग की होगी।
दो साल से विद्यालय विकास मद भी लंबित
MDM के साथ-साथ विद्यालय विकास मद की राशि भी लंबे समय से लंबित होने की शिकायत है। प्रधानाध्यापकों के अनुसार करीब दो वर्षों से विद्यालय विकास के लिए पर्याप्त राशि नहीं मिली है। इसके कारण स्कूलों की छोटी-छोटी आवश्यकताओं को पूरा करने में परेशानी हो रही है।
विद्यालयों में चॉक, डस्टर, झाड़ू, साफ-सफाई और अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था के लिए भी राशि की आवश्यकता होती है। प्रधानाध्यापकों का कहना है कि भुगतान नहीं होने से विद्यालयों के रखरखाव पर भी असर पड़ रहा है।
राष्ट्रीय पर्वों के खर्च का भी भुगतान लंबित
प्रधानाध्यापकों के अनुसार 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों के आयोजन में होने वाले आवश्यक खर्च के लिए भी राशि उपलब्ध नहीं हो रही है। ऐसे में विद्यालयों को छोटे-छोटे कार्यक्रमों का खर्च भी स्वयं वहन करना पड़ रहा है।
जिला शिक्षा अधीक्षक ने कहा- राशि आते ही किया जाएगा भुगतान
इस संबंध में जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज ने कहा कि विभाग को ऊपर से मध्याह्न भोजन मद की राशि अभी प्राप्त नहीं हुई है। जैसे ही राशि विभाग को प्राप्त होगी, विद्यालयों की लंबित MDM राशि के साथ-साथ विद्यालय विकास मद की राशि भी तत्काल रिलीज कर दी जाएगी।
वित्तीय व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल
एक ओर विद्यालयों में बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था चल रही है, वहीं दूसरी ओर महीनों से राशि लंबित रहने के कारण प्रधानाध्यापकों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है।

