
श्री बंशीधर नगर:भगवान श्री बंशीधर मुरली वाले इस नगरी में विराजते हैं, इसलिए इसे श्री बंशीधर नगर कहा जाता है। हम बात कर रहे हैं स्थानीय बंशीधर मंदिर में विराजमान भगवान मुरली वाले बंशीधर की। उनकी कृपा और लोगों की आस्था का ही परिणाम है कि उनके दर से कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं जाता। सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है यहाँ। यहां स्थापित भगवान श्रीकृष्ण की 32 मन सोने से निर्मित अलौकिक प्रतिमा को देखकर देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। ऐसी अलौकिक प्रतिमा को अपने जीवन में पहली बार देखकर लोग इसकी प्रशंसा करते नहीं थकते। उल्लेखनीय है कि स्थानीय नगर ऊंटारीगढ़ के महाराजा स्वर्गीय भवानी सिंह की पत्नी रानी शिवानी कुंवर को भगवान श्रीकृष्ण ने सपने में दर्शन दिए थे। भगवान के निर्देश के अनुसार उन्होंने प्रतिमा को कनहर नदी के किनारे शिव पहाड़ी (उतर प्रदेश)से नगर ऊंटारी लाने का निर्णय लिया। महारानी की इच्छा थी कि भगवान की प्रतिमा को राजमहल में स्थापित किया जाए। परंतु भगवान बंशीधर की अजीब लीला है। उन्होंने नगर ऊंटारी राजमहल के बाहर राजमहल के समीप स्थापित होने का निर्णय लिया। भगवान ने स्वयं अपने स्थान का चयन किया। वहां पहले भगवान की प्रतिमा स्थापित हुई और बाद में मंदिर का निर्माण कराया गया। ऐसी लीला करने वाले और कोई नहीं, भगवान मुरली वाले बंशीधर ही हो सकते हैं। भगवान ने स्वयं नगर ऊंटारी यानी बंशीधर नगर में विराजने की इच्छा जताई। ऐसी कृपा शायद ही किसी भक्त पर भगवान ने की हो। यह भगवान श्रीकृष्ण के प्रति राजमाता शिवानी कुंवर की असीम कृष्ण भक्ति का प्रतिफल ही था कि भगवान ने खुद उनकी नगरी को अपनी नगरी बनाने का निर्णय लिया। नगर ऊंटारी का बंशीधर नगर बनना भगवान की नियति है। यह विराजे मुरली वाले भगवान बंशीधर सभी पर अपनी अनुकंपा न्योछावर करते हैं। स्थानीय बंशीधर मंदिर में जन्माष्टमी को लेकर प्रत्येक वर्ष काफी रौनक रहती है। एक सप्ताह पूर्व से ही मंदिर परिसर में चहल-पहल बढ़ जाती है। पूरे सप्ताह मंदिर प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा, प्रवचन और रासलीला का आयोजन किया जाता है। जन्माष्टमी के दिन देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन-पूजन कर मन्नत मांगते हैं। इस बार 29 अगस्त से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया है, जो 5 सितंबर तक चलेगा। 4 सितंबर को जन्माष्टमी पूरे धूमधाम से मनाई जाएगी।

