रवि कुमार
केतार (गढ़वा):केतार प्रखंड क्षेत्र में मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों की परेशानी बढ़ गई है। काम करने के बावजूद मोबाइल ऐप में तकनीकी गड़बड़ी के कारण कई मजदूरों की हाजिरी दर्ज नहीं हो सकी है। हाजिरी नहीं बनने से मजदूरों के सामने अपनी मेहनत की मजदूरी को लेकर आर्थिक चिंता खड़ी हो गई है।
मजदूरों का कहना है कि वे सुबह घर से निकलकर कार्यस्थल पर पहुंचते हैं, दिनभर मेहनत करते हैं और इसी मजदूरी से उनके घर का चूल्हा जलता है। परिवार के लिए राशन, बच्चों की पढ़ाई, दवा और रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च इसी कमाई से चलता है। ऐसे में यदि तकनीकी गड़बड़ी के कारण हाजिरी दर्ज नहीं हुई और मजदूरी भुगतान प्रभावित हुआ तो इसका सीधा असर उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।
दिनभर पसीना बहाया, अब मजदूरी की चिंता
मजदूरों के लिए मनरेगा की मजदूरी महज एक भुगतान नहीं, बल्कि परिवार चलाने का सहारा है। कई मजदूरों का कहना है कि उधार लेकर घर चलाना उनके लिए संभव नहीं है।ऐसे में एक-दो दिन की मजदूरी भी अटकने पर घरेलू खर्च प्रभावित हो सकता है।
मजदूरों का सवाल है कि *जब उन्होंने मौके पर पहुंचकर काम किया है तो ऐप की तकनीकी खराबी की सजा उन्हें क्यों मिले। डिजिटल व्यवस्था में आई तकनीकी खामी के कारण उनकी मेहनत की कमाई नहीं रुकनी चाहिए।
मजदूरों ने प्रखंड प्रशासन से मांग की है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर तकनीकी समस्या दूर की जाए और जिन मजदूरों ने वास्तव में काम किया है, उनकी छूटी हुई हाजिरी दर्ज कराकर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
मजदूरों को अब प्रशासन से राहत की उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा गरीब परिवारों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में हाजिरी से जुड़ी तकनीकी समस्या का तत्काल समाधान जरूरी है, ताकि किसी मजदूर को उसकी मेहनत की कमाई से वंचित न होना पड़े। अब मजदूरों की निगाह प्रखंड प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।उन्हें उम्मीद है कि तकनीकी गड़बड़ी को आधार बनाकर उनकी मजदूरी नहीं रोकी जाएगी और काम के अनुरूप उनकी हाजिरी व भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।

