केतार(गढ़वा):प्रखंड के मुकुंदपुर गांव स्थित सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक श्री सूर्यनारायण मंदिर के समग्र विकास एवं सौंदर्यीकरण को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सुगबुगाहट तेज हो गई है। इस संबंध में भवनाथपुर की जिला परिषद सदस्या रंजनी कुमारी उर्फ रंजनी शर्मा ने गढ़वा उपायुक्त को एक औपचारिक अनुशंसा पत्र सौंपा है।उन्होंने मुख्यमंत्री सचिवालय से प्राप्त निर्देशों का हवाला देते हुए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास करने तथा विभागीय स्तर पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर जल्द बजट उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। जिला परिषद सदस्य रंजनी शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने पूर्व में राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर मुकुंदपुर स्थित इस अनूठे श्री सूर्यनारायण मंदिर के समग्र विकास के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की थी।मामले की महत्ता को देखते हुए मुख्यमंत्री सचिवालय ने इस पर संज्ञान लिया और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।इसी के आलोक में उन्होंने उपायुक्त गढ़वा को अनुशंसा पत्र सौंपा है। जिस पर संज्ञान लेते हुए उपायुक्त ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और लोक मान्यता का केंद्र
गौरतलब है कि केतार प्रखंड मुख्यालय से पांच किमी दूरी पर पहाड़ की तलहटी में स्थित मुकुंदपुर का श्री सूर्य नारायण मंदिर लगभग 100 वर्ष पुराना ऐतिहासिक विरासत समेटे हुए है। किंवदंतियों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां कार्तिक एवं चैत्र मास के छठ महापर्व के दौरान भगवान भास्कर की आराधना करने और मन्नत मांगने दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसी प्रगाढ़ लोक मान्यता है कि यहां सच्चे मन से छठ व्रत करने वाले निस्संतान दंपतियों की मुरादें पूरी होती हैं और उन्हें पुत्ररत्न की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि झारखंड के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।जिला परिषद सदस्य रंजनी शर्मा ने जोर देकर कहा कि मुकुंदपुर का यह क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अपार संभावनाओं से भरा है। यदि इस पौराणिक स्थल पर पर्यटन विभाग द्वारा प्रशासनिक स्तर पर यात्री शेड,पेयजल,पक्के घाट, प्रकाश व्यवस्था और आवागमन जैसी आधुनिक सुविधाओं का विकास कर दिया जाए तो यह राज्य के मानचित्र पर एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित हो जाएगा। इससे न केवल देशज एवं विदेशी पर्यटकों का आवागमन बढ़ेगा बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को एक नई रफ्तार मिलेगी।

