मंझिआँव (गढ़वा): नगर पंचायत क्षेत्र अंतर्गत न्यूटन कंप्यूटर क्लासेस में सोमवार को ‘वीर बाल दिवस’ का आयोजन बड़े ही भावपूर्ण तरीके से किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी के चारों साहिबजादों के सर्वोच्च बलिदान को याद किया गया। विशेष रूप से छोटी उम्र में धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
श्रद्धांजलि सभा और माल्यार्पण
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के निदेशक अमित कुमार मेहता द्वारा किया गया। उन्होंने बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के चित्र पर दीप प्रज्वलित किया और माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके पश्चात संस्थान के शिक्षकों और सैकड़ों छात्रों ने बारी-बारी से साहिबजादों की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी। पूरा परिसर ‘साहिबजादे अमर रहें’ के नारों और गौरवमयी इतिहास की चर्चा से गुंजायमान रहा।
संस्थान के निर्देशक ने कहा “सहादत की चिंगारी हैं साहिबजादे”
छात्रों को संबोधित करते हुए कंप्यूटर सेंटर के निर्देशक अमित कुमार मेहता ने कहा कि बाल दिवस का वास्तविक अर्थ उन ‘माँ भारती के लालों’ को याद करना है, जिनकी वीरता की कहानी हमारे बच्चों के भीतर देशभक्ति और बलिदान की चिंगारी फूंक दे।उन्होंने इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा, “26 दिसंबर 1705 का वह दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। गुरु गोविंद सिंह जी के दो नन्हें साहिबजादों, बाबा जोरावर सिंह (9 वर्ष) और बाबा फतेह सिंह (7 वर्ष) ने औरंगजेब की क्रूर सल्तनत के सामने झुकने से इनकार कर दिया था। उन्होंने असहनीय यातनाएं सहीं और दीवारों में चिनवाए जाना स्वीकार किया, लेकिन अपना धर्म और स्वाभिमान नहीं छोड़ा। ऐसी महान गाथाएं हमारे बच्चों को त्याग और साहस की सीख देती हैं।”वहीं इस अवसर पर संस्थान के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शिक्षकों ने छात्रों को बताया कि किस तरह कम उम्र में भी साहिबजादों ने अडिग रहकर पूरी दुनिया को वीरता का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने देश सेवा और महापुरुषों के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

