भंडरिया गढ़वा जिले के सबसे दुर्गम, नक्सल प्रभावित और अत्यंत पिछड़े इलाकों में घर-घर जाकर मरीजों का इलाज करने वाले चलंत ग्राम क्लिनिक के डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। पिछले पांच महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं होने के कारण उनके सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है। स्थिति यह है कि मरीजों तक पहुंचने के लिए वाहन में पेट्रोल भरवाने तक के पैसे नहीं बच रहे हैं। इसके बावजूद अब तक ये डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए गांव-गांव जाकर लोगों का इलाज कर रहे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह संकट ऐसे समय में सामने आया है, जब बरसात के कारण ग्रामीण इलाकों में डेंगू, मलेरिया, डायरिया, टाइफाइड और फंगल संक्रमण जैसी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। यदि डॉक्टरों ने मजबूर होकर काम बंद किया, तो सबसे अधिक परेशानी उन हजारों ग्रामीणों को होगी, जिनके लिए चलंत ग्राम क्लिनिक ही इलाज का एकमात्र सहारा है।
जान जोखिम में डालकर पहुंचाते हैं इलाज
चलंत ग्राम क्लिनिक की टीम प्रतिदिन ऐसे गांवों तक पहुंचती है, जहां आज भी पक्की सड़क नहीं है। कई गांवों तक घंटों पैदल चलना पड़ता है, तो कई जगह नदी-नालों को पार कर मरीजों तक पहुंचना होता है। बरसात में रास्ते और भी खतरनाक हो जाते हैं। कई बार अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी गांवों में पहुंचकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों का इलाज करते हैं। लेकिन अब लगातार पांच महीने से मानदेय नहीं मिलने के कारण उनका धैर्य जवाब देने लगा है।
घर का खर्च चलाना भी हुआ मुश्किल
स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि लगातार वेतन नहीं मिलने से परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो गया है। बच्चों की स्कूल फीस, घर का किराया, बिजली बिल, दवाइयां और रोजमर्रा का खर्च तक प्रभावित हो गया है। कई कर्मचारी उधार लेकर अपना घर चला रहे हैं। फील्ड में जाने के लिए वाहन में पेट्रोल भरवाना भी अब भारी पड़ रहा है। इसके बावजूद मरीजों की परेशानी को देखते हुए वे लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
आंदोलन हुआ तो सबसे ज्यादा गरीब होंगे परेशान
कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा है कि वे जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन आर्थिक तंगी की भी एक सीमा होती है। यदि जल्द ही पांच महीने का लंबित मानदेय जारी नहीं किया गया तो वे कार्य बहिष्कार और आंदोलन करने को विवश होंगे। ऐसी स्थिति में दूरदराज के गांवों में घर-घर पहुंचकर इलाज की व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी। इसका सीधा असर गरीब और जरूरतमंद ग्रामीणों पर पड़ेगा, जिन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पाएगा।
प्रशासन से लगाई गुहार
स्वास्थ्यकर्मियों ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग से अविलंब बकाया मानदेय जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को सफल बनाने के लिए वे पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं, लेकिन यदि कर्मचारियों की मूलभूत जरूरतों की अनदेखी होती रही तो स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ेगा।
इन स्वास्थ्यकर्मियों ने उठाई आवाज
चलंत ग्राम क्लिनिक से जुड़े डॉ. अजय सिंह पटेल, डॉ. शाहिद इमरान खान, डॉ. अमित कुमार, डॉ. पंचानंद पासवान, डॉ. पुष्पलता जामुदा, सहायक वीरेंद्र कुमार सिंह, सहायक कौस्तुभ, सहायक रिंकी एवं सहायक ऋतांजलि ने संयुक्त रूप से कहा कि “हम उन गांवों तक पहुंचते हैं, जहां न डॉक्टर पहुंचते हैं और न ही एंबुलेंस आसानी से पहुंच पाती है। आज पांच महीने से मानदेय नहीं मिलने के कारण हमारे परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो मजबूर होकर आंदोलन या काम बंद करना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन और प्रशासन की होगी।

