केतार(गढ़वा):विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत कितनी भयावह है,इसका जीता-जागता उदाहरण केतार प्रखंड क्षेत्र की परती कुशवानी पंचायत के अंतर्गत आने वाले आदिवासी बहुल बसकटिया टोला में देखने को मिल रहा है। इस भीषण और झुलसाने वाली गर्मी में यहाँ के ग्रामीण बूंद-बूंद पेयजल के लिए तरस रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन मौन साधे बैठा है।
एक साल से बंद पड़ा है पानी का सहारा
बसकटिया टोला मोड़ स्थित उदय यादव के घर के पास लगा सरकारी चापाकल पिछले एक वर्ष से पूरी तरह खराब पड़ा है। इस चापाकल के बंद होने से आस-पास के करीब 10 परिवारों के सामने पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां पारा लगातार ऊपर चढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ पानी का कोई दूसरा विकल्प न होने से करीब दर्जन भर घरों के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भरता, गुहार के बाद भी नतीजा सिफर
ग्रामीणों ने दर्द बयां करते हुए बताया कि चापाकल खराब होने के कारण उन्हें इस चिलचिलाती धूप में पानी लाने के लिए काफी दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। महिलाओं और बच्चों का अधिकांश समय सिर्फ पानी ढोने में ही बीत जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस विकट स्थिति से स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के अधिकारियों को कई बार लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया गया है, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।व्यवस्था से नाराज ग्रामीण उदय यादव, नगिना उरांव, अमर उरांव, प्रेम यादव, इन्दवासी देवी, लालू यादव, मुकेश उरांव और शिकेस उरांव आदि ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से अविलंब हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि प्रशासन जल्द से जल्द इस खराब चापाकल की मरम्मत कराए, ताकि इस भीषण गर्मी में लोगों को पेयजल संकट से राहत मिल सके। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया विभाग कब जागता है और इन आदिवासियों की प्यास बुझाने के लिए क्या कदम उठाता है।

