
सगमा (गढ़वा): नस एवं जोड़ों के दर्द से परेशान लोगों के लिए धुरकी प्रखंड के रक्सी गांव निवासी कामेश्वर बेदिया किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रहे हैं। पिछले 15 वर्षों से वे अपने हाथों के माध्यम से देसी तरीके से लोगों का इलाज कर रहे हैं। दावा किया जाता है कि अब तक करीब 10 हजार से अधिक मरीजों को राहत मिल चुकी है। यह कोई विज्ञापन नहीं, बल्कि लोगों के अनुभवों पर आधारित हकीकत बताई जा रही है। आपकी खबर प्रतिनिधि भी लगभग डेढ़ वर्ष से बाएं पैर के घुटने के दर्द से परेशान थे। कई लोगों ने सलाह दी कि रक्सी गांव जाकर कामेश्वर बेदिया से मिलिए, जो नस और जोड़ों के दर्द का बिना दवा इलाज करते हैं।
जब प्रतिनिधि उनके घर पहुंचे तो वहां बाहर बड़ी संख्या में दोपहिया और चारपहिया वाहन खड़े थे। पूर्व परिचित होने के कारण आवाज लगाने पर कामेश्वर बेदिया बाहर आए, प्रणाम किया और बैठने के लिए कुर्सी दी। उन्होंने कहा कि आधा घंटा समय दीजिए। इसी दौरान देखा गया कि जो लोग दूसरों के सहारे दर्द से कराहते हुए आए थे, वे मुस्कुराते हुए अपने पैरों पर चलकर लौट रहे थे। वहां मौजूद कई लोगों से बातचीत करने पर उन्होंने बताया कि किसी को नस की समस्या थी, तो किसी को जोड़ों में लगातार दर्द रहता था। कई मरीजों ने कहा कि दवा लेने के बावजूद राहत नहीं मिल रही थी, लेकिन यहां आने के बाद काफी आराम महसूस हुआ। इस संबंध में पूछे जाने पर कामेश्वर बेदिया ने बताया कि वे पिछले 15 वर्षों से नस और जोड़ों से संबंधित बीमारियों का अपने अनुभव के आधार पर बिना दवा इलाज कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब तक लगभग 10 हजार मरीजों का उपचार कर चुके हैं।इलाज के लिए उन्होंने सेवा शुल्क भी एक छोटे बोर्ड पर लिख रखा है। इसमें एक हाथ के इलाज के लिए 100 से 150 रुपये तथा पैर के इलाज के लिए 150 से 250 रुपये तक शुल्क निर्धारित है। उन्होंने बताया कि महिला मरीजों का इलाज महिलाओं के माध्यम से कराया जाता है।प्रतिनिधि ने भी बताया कि उनका इलाज जारी है और अब वे खुद को पहले से बेहतर व स्वस्थ महसूस कर रहे हैं। कामेश्वर बेदिया के यहां इलाज कराने आने वालों में झारखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

