केतार(गढ़वा):प्रखंड के ताली गांव में चल रहे श्री चंडी महायज्ञ एवं दुर्गा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित श्रीराम कथा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय कर दिया है। उत्तर प्रदेश के गुप्तकाशी से पधारे प्रख्यात कथावाचक महाराज श्री सौरभ भारद्वाज के मुखारविंद से प्रवाहित श्रीराम कथा के अमृत ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।कथावाचक महाराज श्री ने रामचरितमानस की चौपाइयों के माध्यम से जीवन जीने की कला सिखाई। उन्होंने विशेष रूप से सत्ता और पद के मद में चूर होने वाले लोगों को आईना दिखाते हुए कहा कि, “यदि किसी व्यक्ति को कोई ऊंचा पद या जिम्मेदारी मिलती है,तो उसे अहंकार का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। पद का वास्तविक अर्थ प्रभु की सेवा और जन-कल्याण है।” उन्होंने संदेश दिया कि ईश्वर की कथा का उद्देश्य केवल मनोरंजन या कानों का सुख नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन के आचरण में उतारना है।महाराज ने सती प्रसंग की व्याख्या करते हुए सत्य, धर्म और मर्यादा का मार्ग अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो मनुष्य रामकथा को आत्मसात करता है,उसका जीवन सार्थक हो जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के पदचिह्नों पर चलने की प्रेरणा दी।कथा के दौरान पूरा पंडाल भक्ति रस से सराबोर दिखा। जैसे ही कथा का समापन हुआ, ‘जय श्री सीताराम’ के उद्घोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो गया। श्रद्धालु भक्ति भाव से इतने भरे हुए थे कि हर ओर तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई दे रही थी।इस आध्यात्मिक आयोजन को सफल बनाने में यज्ञ समिति के सदस्यों और स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका सराहनीय रही। आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा का लाभ उठाया और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

