श्री बंशीधर नगर : आजादी के 80 वर्ष बीत जाने के बाद भी भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की बदहाली आज भी क्षेत्र के विकास पर सवाल खड़े कर रही है। शहर को गांवों से जोड़ने के लिये मुख्य सड़कों का निर्माण तो हुआ, लेकिन गांव से गांव को जोड़ने वाली संपर्क सड़कें अब भी उपेक्षा का शिकार हैं। खासकर बरसात के दिनों में इन सड़कों की स्थिति और भी नारकीय हो जाती है। जिससे ग्रामीणों को अपने गांव से निकलकर पक्की सड़क तक पहुंचने के लिये कीचड़युक्त दलदल सड़क से होकर गुजरना पड़ता है। सच्चाई भी यह है कि कई गांवों में सड़क खेत के रूप में तब्दील हो जाता है। इसका सीधा असर पढ़ने वाले स्कूली बच्चों, मरीजों एवं किसानों को घर से बाहर निकलने वाले लोगों पर पड़ रहा है।
दो राज परिवारों का रहा राजनीतिक दबदबा, लेकिन नहीं हुआ चहुंमुखी विकास
भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास पर गौर करें तो यहां का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। यहां क्षेत्र की राजनीति में दो राज परिवारों का लंबे समय से दबदबा रहा है। उसके बाद भी क्षेत्र की बदहाली दूर नहीं हुई। यहां से चुने गये प्रतिनिधियों को राज्य में मंत्री बनने का भी अवसर मिला, लेकिन क्षेत्र का चहुंमुखी विकास नहीं हो सका।
झारखंड गठन के बाद भवनाथपुर क्षेत्र से निर्वाचित रामचंद्र केशरी को प्रथम कैबिनेट मंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और उन्हें जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी मिली। इसके बावजूद क्षेत्र में सिंचाई के क्षेत्र में अपेक्षित बदलाव नहीं हो सका। नतीजा भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र के किसानों को आज भी वर्षा आधारित खेती पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इसी तरह पूर्व मंत्री भानू प्रताप शाही को भी स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी मिली।
उसके बावजूद क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लोगों की परेशानी दूर नहीं हुई। आज भी लोगों को बेहतर इलाज के लिये रांची एवं उत्तर प्रदेश के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। पूर्व मंत्री के कार्यकाल में शुरू कराया गया अस्पताल भवन भी लंबे समय से अधूरा पड़ा है और अपनी बदहाली पर आठ आठ आंसू बहा रहा है।

