दो साल पहले मां को खो चुकी थीं बच्चियां, अब पिता की मौत से अनाथ हुईं पांच मासूम
मेराल(गढ़वा):मां की ममता से दो साल पहले ही महरूम हो चुकी पांच मासूम बच्चियों के सिर से अब पिता का साया भी उठ गया। जिस पिता के सहारे वे जिंदगी की मुश्किलों से लड़ना सीख रही थीं, उसकी मौत ने उनके बचपन से खुशियों का सहारा भी छीन लिया।थाना क्षेत्र के करकोमा गांव में मंगलवार की सुबह राजेश भुईयां (37 वर्ष), पिता बंसी भुईयां की मौत की खबर से जहां परिवार में मातम पसर गया, वहीं गांव के लोग भी पांचों बच्चियों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। जानकारी के अनुसार, सोमवार की शाम राजेश भुईयां अपने खेत में पानी पटाने के लिए घर से निकले थे। देर रात तक घर नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई। मंगलवार की सुबह गांव में नाले के पास उन्हें अचेत अवस्था में देखा गया। इसकी सूचना मिलते ही परिजन आनन-फानन में उन्हें मेराल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां चिकित्साकर्मियों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। राजेश की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवार के लोगों ने आशंका जताई है कि किसी ने गला दबाकर उनकी हत्या कर उन्हें नाले के किनारे फेंक दिया होगा। परिजनों का कहना है कि सुबह जब उन्हें देखा गया, तब वे जीवित थे। घटना की जानकारी मिलने पर मेराल थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और परिजनों का बयान दर्ज किया। पुलिस मामले की परिस्थितियों की जांच कर रही है। इधर, गांव के मुखिया वीरेंद्र नाथ तिवारी ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में हत्या की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। मुखिया ने पीड़ित परिवार की स्थिति को देखते हुए सरकारी प्रावधानों के तहत पांचों बच्चियों को सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया है।
पांच मासूमों के सामने परवरिश का बड़ा सवाल
राजेश भुईयां की पत्नी का निधन करीब दो वर्ष पहले हो गया था। पत्नी की मौत के बाद से ही राजेश अपनी पांच छोटी-छोटी बच्चियों की परवरिश अकेले कर रहे थे। मेहनत-मजदूरी और खेती के सहारे वे अपने परिवार का जीवन चलाने की कोशिश कर रहे थे। अब उनकी अचानक हुई मौत ने पांचों बच्चियों को पूरी तरह बेसहारा कर दिया है। जिन नन्हे हाथों को पिता की उंगली थामकर आगे बढ़ना था, आज उन्हीं हाथों के सामने जीवन की सबसे कठिन चुनौती खड़ी हो गई है। मां के जाने के बाद पिता ही उनके लिए दुनिया का सबसे बड़ा सहारा थे, लेकिन नियति ने वह सहारा भी छीन लिया। राजेश की मौत से गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीणों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल इन पांचों बच्चियों की पढ़ाई, परवरिश और सुरक्षित भविष्य का है। ऐसे कठिन समय में सरकारी सहायता के साथ-साथ समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और परिजनों की संवेदनशील पहल बेहद जरूरी है। पांच बच्चियों के जीवन में आए इस अंधकार के बीच उम्मीद की किरण तभी जगेगी, जब कोई उनके सिर पर संरक्षण का हाथ रखेगा। प्रशासन और संबंधित विभागों से अपेक्षा है कि बच्चियों की स्थिति का आकलन कर उन्हें नियमानुसार सहायता, शिक्षा और संरक्षण उपलब्ध कराने की पहल करें, ताकि मां-बाप दोनों को खो चुकी इन मासूमों का भविष्य असहाय होकर न रह जाए। फिलहाल, राजेश भुईयां की मौत के कारणों का पता लगाना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही, इन पांच अनाथ बच्चियों की परवरिश और भविष्य की जिम्मेदारी सुनिश्चित करना भी समाज और प्रशासन के सामने एक गंभीर मानवीय चुनौती है।

