विशुनपुरा प्रखंड मुख्यालय स्थित विष्णु मंदिर तालाब के सौंदर्यीकरण एवं छठ घाट निर्माण योजना को लेकर मामला चर्चा में आ गया है। एक ओर वर्तमान विधायक अनंत प्रताप देव ने विष्णु मंदिर तालाब के सौंदर्यीकरण की आधारशिला रखी, वहीं दूसरी ओर उपायुक्त को पत्र लिखकर योजना के कार्यस्थल को स्थानांतरित करने की अनुशंसा की गई है। इससे स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल उठने लगे हैं।
बताया जाता है कि विधानसभा चुनाव के दौरान अनंत प्रताप देव ने कहा था कि चुनाव जीतने के बाद उनका सबसे पहला काम विशुनपुरा स्थित विष्णु मंदिर तालाब का सौंदर्यीकरण कराना होगा। चुनाव जीतने के बाद जब इसी तालाब के सौंदर्यीकरण एवं छठ घाट निर्माण की योजना स्वीकृत हुई, तो 9 अगस्त 2026 को विधायक ने स्वयं योजना की आधारशिला रखी।
योजना के तहत अनावद मद से 24 लाख 36 हजार 400 रुपये की राशि स्वीकृत है। लेकिन आधारशिला रखे जाने के कुछ ही समय बाद 26 अगस्त 2026 को विधायक अनंत प्रताप देव द्वारा उपायुक्त, गढ़वा को पत्र लिखकर योजना के स्थल परिवर्तन की अनुशंसा किए जाने से मामला पेचीदा हो गया है।
तालाब को निजी जमीन बताकर कार्य रोकने का मामला
जानकारी के अनुसार, वर्तमान विधायक अनंत प्रताप देव के बड़े भाई एवं पूर्व विधायक राज राजेंद्र प्रताप देव द्वारा विष्णु मंदिर स्थित तालाब की जमीन को निजी जमीन बताते हुए सौंदर्यीकरण कार्य पर रोक लगाए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद विधायक की ओर से योजना को दूसरे स्थल पर स्थानांतरित करने की अनुशंसा की गई।
विधायक के पत्र में ग्रामीणों की सुविधा एवं जनभावनाओं का हवाला देते हुए बांकी नदी के किनारे अथवा सूर्य मंदिर के पास छठ घाट निर्माण के लिए स्थल परिवर्तन की अनुशंसा की गई है।
हजारों छठव्रतियों की आस्था का केंद्र है विष्णु मंदिर का तालाब
विष्णु मंदिर का यह तालाब धार्मिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। छठ महापर्व के दौरान यहां हजारों छठव्रती भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं। क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से इस तालाब के बेहतर सौंदर्यीकरण एवं छठ घाट के विकास की मांग रही है।
पहले भी सरकारी राशि से कराया जा चुका है जीर्णोद्धार
स्थानीय लोगों के अनुसार, इसी तालाब का पूर्व में स्पेशल डिवीजन से करीब 12 लाख रुपये की लागत से जीर्णोद्धार कराया जा चुका है। इसके अलावा जिला परिषद की निधि से छठ घाट का निर्माण भी कराया गया है। ऐसे में ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि तालाब की जमीन निजी है, तो पूर्व में सरकारी राशि से यहां विकास कार्य किस आधार पर कराया गया।
योजना की आधारशिला रखना और फिर कार्यस्थल को ही बदलने के लिए उपायुक्त को पत्र देना स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले में तालाब की जमीन के स्वामित्व, पूर्व में खर्च हुई सरकारी राशि और वर्तमान योजना के स्थल परिवर्तन को लेकर प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
विष्णु मंदिर समिति के अध्यक्ष बोले- जहां की योजना है वहीं होना चाहिए निर्माण
विष्णु मंदिर समिति के अध्यक्ष नारायण शर्मा ने कहा कि विष्णु मंदिर तालाब क्षेत्र के लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ स्थल है। वर्षों से यहां छठ पूजा होती आ रही है और प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में छठव्रती यहां पहुंचते हैं। ऐसे में जिस स्थान के लिए छठ घाट एवं सौंदर्यीकरण की योजना स्वीकृत हुई है, उसी स्थान पर योजना का निर्माण होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि योजना स्वीकृत होने के बाद उसका विधिवत शिलान्यास भी किया जा चुका है। इसके बाद अचानक स्थल परिवर्तन की बात सामने आना उचित नहीं है। वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए उसी स्थल पर सौंदर्यीकरण एवं छठ घाट का निर्माण कराया जाए।
विष्णु मंदिर समिति के सचिव गौरी शंकर प्रसाद गुप्ता ने कहा कि विष्णु मंदिर तालाब पर छठ घाट का निर्माण क्षेत्रवासियों की पुरानी मांग है। ऐसी स्थिति में स्वीकृत योजना को किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाना उचित नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि जिस स्थान के लिए योजना बनाई गई है, उसी स्थान पर योजना का क्रियान्वयन होना चाहिए।
सचिव ने कहा कि पहले भी इस तालाब का सरकारी स्तर पर जीर्णोद्धार कराया जा चुका है तथा जिला परिषद की राशि से छठ घाट का निर्माण हुआ है। ऐसे में अब यहां स्वीकृत करीब 24.36 लाख रुपये की सौंदर्यीकरण योजना को पूरा किया जाना चाहिए, ताकि तालाब और छठ घाट को व्यवस्थित एवं विकसित किया जा सके।
अब ग्रामीणों और मंदिर समिति की निगाहें प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं कि 24.36 लाख रुपये की यह योजना विष्णु मंदिर तालाब में ही धरातल पर उतरती है या इसे किसी दूसरे स्थल पर स्थानांतरित किया जाता है।

