केतार(गढ़वा):परती कुशवानी पंचायत के छाताकुण्ड गांव में बाघमानवा जंगल के किनारे वर्षों से रह रहे परिवार आज भी वन भूमि पट्टे के इंतजार में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनके दादा-परदादा के समय से परिवार यहां रहकर गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन अब तक भूमि अधिकार से संबंधित कोई पट्टा या कागजात नहीं मिल पाया है।ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक उपेक्षा के कारण उनकी समस्या वर्षों से बनी हुई है। सबसे बड़ी चिंता अब सोन परियोजना को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बांध निर्माण में उनकी जमीन और घर डूब गए तो बिना कागजात के वे सरकार के सामने अपना दावा कैसे पेश करेंगे।एक ग्रामीण ने कहा, “हम पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं। जमीन का कागज नहीं है और वन पट्टा भी नहीं मिला। अगर सोन परियोजना में जमीन चली गई तो हमारा क्या होगा, हम कहां जाएंगे?”ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सर्वे कर पात्र परिवारों को वन भूमि का पट्टा देने तथा सोन परियोजना से संभावित प्रभावित परिवारों के अधिकार और पुनर्वास को पहले से सुनिश्चित करने की मांग की है।

