धुरकी ( गढ़वा) इस वैज्ञानिक युग में भी अंधविश्वास की जड़े इतनी मजबूत है की अंधविश्वास की चादर ओढ़े है व्यक्ति अपनी जान की परवाह भी नहीं कर पा रहा है कुछ इसी तरह का मामला धुरकी थाना क्षेत्र के कुंबकला गांव में घटित हुई है आदिम जनजाति समुदाय से आने वाले कैलाश कोरवा उम्र 50 वर्ष की जहरीले जंतु के काटने से मौत हो गई प्राप्त समाचार के अनुसार वह सोमवार को अपने धान के खेत में धान की फसल देखने गए थे जहां की जहरीले जंतु ने काट लिया घर आकर उन्होंने आसपास के झाड़ फूक करने वालों से झाड़ तोक करते रहे फिर दूसरे दिन इलाज के लिए नगर ऊटारी से गढ़वा गया जहां उसकी मौत हो गई अगर समय रहते इलाज कराने गया रहता तो तो संभवत कैलाश कोरवा की आज असमय मृत्यु नहीं होती कैलाश कोरवा के दो पुत्र है जो बाहर पलायन किए हुए हैं बच्चों के आने की उम्मीद में शव को घर में रखा गया है बच्चों के आने के बाद ही दाह संस्कार होगा घटना की सूचना पाकर मुखिया प्रतिनिधि सतनारायण बैठा उप प्रमुख धर्मेंद्र यादव प्रमुख शांति देवी, जिला परिषद सुनीता कुमारी, सहित दर्जनों लोगों ने उसके घर जाकर शोक संपत परिवार को ढांढस बंधाया है तथा लोगों ने सरकार से मुआवजा राशि दिलाने की मांग की है

