विशुनपुरा थाना क्षेत्र के अमहर गांव में आठ माह पूर्व हुई मारपीट की घटना ने गुरुवार को गंभीर रूप ले लिया, जब गंभीर रूप से घायल किए गए उपेंद्र चन्द्रवँशी (45) की मौत हो गई। मौत की सूचना मिलते ही अमहर गांव के सैकड़ों ग्रामीण उग्र हो गए और शव को रमना–विशुनपुरा मुख्य सड़क पर रखकर जाम कर दिया। ग्रामीण सुबह 9 बजे से सड़क पर धरना पर बैठे हैं और डीसी तथा एसपी को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े हुए हैं।ग्रामीण चौकीदार कन्हाई पासवान को बर्खास्त करने, आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और न्याय सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। सड़क जाम के दौरान ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद थाना वापस जाओ मनमानी नहीं चलेगी, जैसे नारे इलाके में गूंजते रहे।घटना की जानकारी मिलते ही विशुनपुरा अंचल अधिकारी खगेश कुमार, थाना प्रभारी राहुल कुमार सिंह दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करने लगे, लेकिन लोग डीसी–एसपी की उपस्थिति की जिद पर कायम हैं।
आठ माह पुरानी घटना में न्याय न मिलने का आरोप
परिजनों के अनुसार होली की रात उपेंद्र चन्द्रवँशी और प्रशांत कुमार को गांव के चौकीदार कन्हाई पासवान, पत्नी मेत्री देवी, पुत्र रौशन पासवान, छोटू पासवान और पुत्री करिश्मा कुमारी ने बेरहमी से पीटा था। उपेंद्र के सिर में गंभीर चोट आई थी और तब से उनका इलाज लगातार चल रहा था। माथे की सर्जरी भी हुई थी। इलाज करवाकर वे आठ दिन पूर्व ही घर लौटे थे, लेकिन गुरुवार सुबह 8 बजे उनकी मृत्यु हो गई।
परिजनों का आरोप है कि विशुनपुरा थाना में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद प्रशासन की लापरवाही के कारण चौकीदार कन्हाई पासवान को आसानी से बेल मिल गई और वह ड्यूटी पर भी बहाल रहा। परिजनों ने कहा कि आरोपियों के खुलेआम घूमने से पीड़ित परिवार लगातार भय में था।इलाज में बिक गई जमीन, टूट गया परिवारप
रिजनों ने बताया कि आठ माह लंबा इलाज कराते-कराते परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। जमीन-जायदाद तक बेचनी पड़ी, फिर भी न्याय नहीं मिला। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर घोर लापरवाही और मामले को दबाने का आरोप लगाया।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक जिले के शीर्ष अधिकारी मौके पर नहीं आएंगे और कार्रवाई की घोषणा नहीं करेंगे, जाम नहीं हटेगा।


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