रंका(गढ़वा):सरना विकास परिषद गढ़वा के तत्वावधान में रंका प्रखंड के ग्राम खूरा स्थित उरांव आदिवासी सरना समाज द्वारा करमा पर्व की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसी क्रम में मंगलवार को युवक-युवतियों ने परंपरागत तरीके से जावा (जौ) मिट्टी में रखने तथा सप्तधान्य उगाने की रस्म का आयोजन किया। समाज ने उत्साह के साथ रस्म निभाई।आदिवासी सरना समाज में करमा पर्व के दौरान जावा (जौ) रखने और सप्तधान्य उगाने का विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक एवं कृषि संबंधी महत्व माना जाता है। जावा रखने की परंपरा फसलों की उर्वरता और अच्छी पैदावार की कामना से जुड़ी है। इसमें सात प्रकार के सप्तधान्य के अंकुरित बीजों को टोकरी में मिट्टी डालकर उगाया जाता है। यह धरती की उर्वरता और आने वाले समय में अन्न की भरपूर पैदावार का प्रतीक माना जाता है।यह रस्म भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का भी प्रतीक है। करमा पर्व के अंतिम दिन बहनें उगे हुए जौ को भाइयों के कान या कलाई में खोंसती अथवा बांधती हैं। मान्यता है कि इसके माध्यम से बहनें भाइयों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करती हैं। जावा प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक भी माना जाता है। आदिवासी समाज की मान्यता है कि मानव जीवन जल, जंगल और जमीन सहित प्रकृति पर निर्भर है। नई फसल के स्वागत और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के उद्देश्य से जावा की पूजा की जाती है। इस अवसर पर कुंवारी युवतियां व्रत रखकर जावा की देखभाल करती हैं। इसे पवित्रता, सौभाग्य और सामाजिक भाईचारे का संदेशवाहक माना जाता है। आदिवासी सरना विकास परिषद गढ़वा के कोषाध्यक्ष उमेश उरांव ने बताया कि जिलेभर में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मौके पर ग्राम खूरा के पाहन पुजारी सुंदर उरांव, लवली उरांव, लक्ष्मण उरांव, योगेंद्र उरांव, अनुप उरांव, दिलीप उरांव, विकास उरांव, मधुसूदन राम, प्रयाग उरांव, खुश्बू उरांव, रंगिला उरांव, रूबी उरांव और गुड़िया उरांव सहित बड़ी संख्या में युवक-युवतियां उपस्थित रहे।

