मेराल(गढ़वा):नाम के अनुरूप काम करने वाले मेराल के राम मूरत प्रसाद सोमवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। सैकड़ों नम आंखों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य सहित गोतिया परिवार तथा रिश्तेदार उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए। राम मूरत उर्फ गुजुर का दुखद निधन रविवार की शाम में सड़क दुर्घटना के बाद गढ़वा सदर अस्पताल में हो गया था। बता दे की राम मूरत प्रसाद बचपन से ही हंसमुख और मिलनसार थे। वर्तमान समय में वह अपने नए मकान जो हाई स्कूल के समीप है रह कर अपना स्टेशनरी दुकान के साथ-साथ सुबह शाम शिव मंदिर में पूजा-पाठ करने जाया करते थे। प्रतिदिन की भांति रविवार की शाम में मंदिर से पूजा कर घर लौट रहे थे की एक अनियंत्रित बाइक जिसपर तीन लोग सवार थे धक्का मार दिया जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनका अंतिम संस्कार स्थानीय सरस्वतीया नदी श्मशान घाट पर किया गया।
समय पर होता इलाज तो बच सकती थी जान : परिजन
राम मूरत की सड़क दुर्घटना से परिजनों के साथ-साथ स्थानीय लोगों में सरकारी व्यवस्था को लेकर रोष व्याप्त है। परिजन और मेराल के व्यावसायिक संघ के अध्यक्ष नवीन कुमार जयसवाल, पुत्र दीपेश कुमार, दीपलेश्वर, सुनील कुमार ने बताया कि सड़क दुर्घटना के बाद हम लोगों ने आनन-फानन में उन्हें मेराल सीएचसी में ले गए, जहां न तो चिकित्सक थे और न ही कोई कंपाउंडर, सिर्फ सुरक्षा गार्ड मौजूद थे। उन्होंने कहा कि डॉक्टर साहब को फोन कर बुलाते हैं। वहां 10 मिनट रुकने के बाद भी जब कोई चिकित्सक नहीं आए तो जीवन और मौत से जूझ रहे अपने परिजन की जान बचाने की आतुरता में उन्हें गढ़वा सदर अस्पताल ले गए जहां चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। लोगों का आरोप है कि अगर मेराल अस्पताल में उनका प्राथमिक उपचार कर रक्तस्राव को बंद कर दिया जाता तो उनकी जान बच सकती थी। लोगों ने कहा कि मेराल के सरकारी अस्पताल का यह पहली घटना नहीं है जब एक्सीडेंटल केस आता है तो यहां चिकित्सक गायब पाए जाते हैं।

