विशुनपुरा(गढ़वा):प्रखंड के पिपरीकला पंचायत अंतर्गत पातों सुरक्षित वन क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। वन विभाग को मिली गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में हिरन (कोटरा) के अवैध शिकार का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले ने सुरक्षित वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।सूचना मिलते ही वन क्षेत्र पदाधिकारी प्रमोद कुमार के नेतृत्व में एक विशेष छापामारी दल का गठन किया गया। गुरुवार को दोपहर करीब 2 बजे वन विभाग की टीम ने संबंधित क्षेत्र में छापेमारी की। छापामारी के दौरान टीम को चतरगुन यादव के घर से हिरन प्रजाति (कोटरा) का मांस रहित, अवैध रूप से रखा गया एक जोड़ा सींग बरामद हुआ। मौके से अन्य आवश्यक साक्ष्य भी जब्त किए गए।
वन विभाग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए वन्य प्राणी (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत चतरगुन यादव सहित कुल आठ लोगों को नामजद अभियुक्त बनाते हुए प्राथमिकी दर्ज की है। विभागीय सूत्रों के अनुसार सभी आरोपियों के विरुद्ध विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है, और आगे और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।इस छापामारी अभियान में प्रभारी वनपाल नीरज कुमार मेहता, वनरक्षी ध्रुव कुमार एवं प्रवीण कुमार शुक्ला की सक्रिय भूमिका रही। अधिकारियों ने बताया कि संरक्षित वन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का अवैध शिकार, वन्यजीव अंगों का संग्रहण या तस्करी कानूनन अपराध है, जिस पर शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जा रही है।वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि सुरक्षित वन क्षेत्रों में अवैध शिकार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को कानून के तहत कड़ी सजा दिलाई जाएगी। साथ ही आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे वन्यजीव संरक्षण में भागीदार बनें और यदि कहीं भी शिकार, तस्करी या अन्य संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें, ताकि वन्य संपदा, जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वन्यजीव संरक्षण पर बड़ा प्रहार, सुरक्षित जंगल में हिरन (कोटरा) शिकार का पर्दाफाश, आठ पर केस

