भंडरिया प्रखंड के जोगिया मठ टोला स्थित ढापन पानी पहाड़ी में सरना उरांव आदिवासी समिति भंडरिया के तत्वावधान में सरना झंडा स्थापना कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर गढ़वा और पलामू जिले के दर्जनों गांवों से सरना आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम में समाज की एकता, अखंडता तथा सरना धर्म, संस्कृति, परंपरा, भाषा और रीति-रिवाजों को बचाने पर विशेष रूप से जोर दिया गया।कार्यक्रम की शुरुआत जुर्मुनिया नदी से कलश यात्रा के साथ हुई। गांव की महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में कलश में जल भरकर पारंपरिक गाजे-बाजे के साथ जुलूस निकाला। कलश यात्रा पूरे गांव का भ्रमण करते हुए कर्मा अखरा पहुंची, जहां समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार पाहन इन्द्र बाखला के नेतृत्व में विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद सभी लोग कार्यक्रम स्थल जोगिया मठ टोला स्थित ढापन पानी पहाड़ी पहुंचे।कार्यक्रम स्थल पर सरना झंडा विधिवत स्थापित किया गया। इस दौरान उपस्थित समाज के बुद्धिजीवियों और वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, भाषा और परंपराओं से होती है। यदि हम अपनी परंपरा और संस्कृति को सहेजकर नहीं रखेंगे तो आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से दूर हो जाएंगी।इस अवसर पर समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे सरना धर्म, आदिवासी संस्कृति, भाषा और रीति-रिवाजों की रक्षा करेंगे तथा इसे आने वाली पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंचाने का प्रयास करेंगे। कार्यक्रम में क्षेत्र के कई गांवों के समाज के लोग, बुजुर्ग, महिलाएं, युवा तथा सरना उरांव आदिवासी समिति के हरिदास तिर्की,झगरू मिंज लक्ष्मन उरांव, शंभू उरांव, राजेंद्र तिर्की,पीटर उरांव, अतुल उरांव, सुनीत मिंज, संजय कच्छप, आदि सदस्य उपस्थित थे।

