कांडी (गढ़वा):प्रखंड अंतर्गत पंचायत सचिवालय पतिला में शनिवार को भीम बराज से निकलने वाली नॉर्थ कैनाल के निर्माण से प्रभावित लोगों की बैठक बुलाई गई। जिसको लेकर मुआवजा मामला में प्रशासन ने रैयतों के साथ बैठक कर काउंसिलिंग के दौरान समाधान निकालने का प्रयास किया। नहर निर्माण में अधिग्रहित की जा रही भूमि का मुआवजा अब तक नहीं मिलने से नाराज रैयतों (भूस्वामियों) ने कार्य पर रोक लगा दी है।रैयतों अमित कुमार दुबे, ऊषा नारायण दुबे, रामनाथ दुबे, सीताराम मेहता, रामेश्वर मेहता, विनीत कुमार दुबे, लालबिहारी दुबे, महेंद्र दुबे, जितेंद्र दुबे, नरेंद्र दुबे, राम नाथ दुबे समेत दर्जनों रैयतों का कहना है कि उनकी जमीन नहर निर्माण के लिए ली जा रही है। लेकिन अब तक उन्हें मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया गया है। बिना नई भू अर्जन नीति के अनुसार मुआवजा दिए निर्माण कार्य शुरू कर दिए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश है। इसी के विरोध में ग्रामीणों ने एकजुट होकर निर्माण कार्य रोक दिया और प्रशासन से वार्ता की मांग की।मामले की गंभीरता को देखते हुए गढ़वा एसी राज महेश्वरम, सदर एसडीओ संजय कुमार, एसडीपीओ नीरज कुमार, पुलिस निरीक्षक बृज कुमार, बीडीओ सह सीओ राकेश सहाय, प्रमुख सत्येंद्र पांडेय, कांडी थाना प्रभारी मोहम्मद अशफाक आलम, हुसैनाबाद अनुमंडल पदाधिकारी सह भू-अर्जन पदाधिकारी गौरांग महतो, रूपांकन प्रमंडल पलामू के कार्यपालक अभियंता जागेश्वर रजवार, प्रोजेक्ट मैनेजर नॉर्थ कोयल अमित शर्मा तथा जीएम नॉर्थ कोयल परियोजना सहित अन्य अधिकारी पंचायत सचिवालय पतिला पहुंचे।
अधिकारियों ने रैयतों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान चोका गांव निवासी जमीन जानेवाले 16 व सरकोनी के 9 रैयत तथा पतिला के जिनका मकान टूट रहा है ऐसे 4 रैयत उपस्थित थे। वार्ता के दौरान अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि एक सप्ताह के भीतर नहर में पड़ने वाली भूमि का मुआवजा भुगतान कर दिया जाएगा। मुआवजा वितरण के बाद ही संबंधित भूमि पर नहर निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। रैयतों की ओर से युवा समाजसेवी रजनीश रंजन दुबे उर्फ विकास दुबे ने नेतृत्व किया। फिलहाल निर्माण कार्य स्थगित है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि तय समय सीमा के भीतर भुगतान प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। अब सभी की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि समय पर मुआवजा नहीं मिला, तो ग्रामीणों द्वारा पुनः आंदोलन की चेतावनी दी गई है। यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन शीघ्र ही सकारात्मक समाधान निकालेगा।

