केतार(गढ़वा):क्षेत्र में पिछले कई महीने से आतंक का पर्याय बने एक काले सांड को पकड़ने के लिए वन और पशुपालन विभाग का संयुक्त अभियान मंगलवार को असफल साबित हुआ।पलामू टाइगर रिजर्व (पिटीआर ) और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीम को मवेशी को काबू में करने के लिए करीब पांच घंटे तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।अभियान के दौरान सांड को नियंत्रित करने के लिए पहले बेहोशी की दवा दी गई, लेकिन पूरा असर न होने पर गनशॉट के माध्यम से अतिरिक्त दवा देने का प्रयास किया गया। इससे सांड और अधिक बेकाबू हो गया और करीब आठ किलोमीटर तक दौड़ता रहा। टीम ने सुरक्षित दूरी से उसका पीछा कर आखिरकार रस्सी के फंदे से उसे दबोच लिया। इसके बाद पशु चिकित्सकों ने मौके पर ही उसकी नसबंदी कर दी। हालांकि,जब उसे पिकअप वाहन पर चढ़ाया जा रहा था,तभी अचानक रस्सी खुल जाने के कारण वह एक बार फिर भाग निकला।इस लंबी कार्रवाई के बावजूद सांड को आबादी से दूर सुरक्षित स्थान पर ले जाने में सफलता नहीं मिल पाई। घटना के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। लगातार बने इस खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से एक बार फिर विशेषज्ञ टीम भेजने और सांड को सुरक्षित तरीके से पकड़कर आबादी से दूर भेजने की मांग की है।
इस संयुक्त रेस्क्यू अभियान में पशुपालन विभाग के डॉ. रामप्रवेश राम, डॉ. चंदन, डॉ. नीरज कांत, पीटीआर के डॉ. सुनील देव, पाल भगत, एसआई आदित्य कुमार के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीण अक्षय कुमार गुप्ता, रामाशीष यादव, राम अवध यादव, प्रेमचंद गुप्ता, शिवपूजन जायसवाल और मनीष कमलापुरी समेत कई अन्य लोग उपस्थित रहे।
नसबंदी के बाद पिकअप से कूदकर भागा सांड, 5 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन

