धुरकी थाना क्षेत्र के सगमा के झुनूकिया टोला गांव निवासी अयोध्या राम के पुत्री रीता कुमारी पिछले कई महीनो से अपनी जिंदगी में न्याय की आस लिए दर-दर भटक रही है। रीता का कहना है कि पांच वर्ष पहले उसकी मुलाकात पुतुर गांव के छपरवा टोला निवासी शेषमन प्रजापति के पुत्र अरविन्द प्रजापति से हुई थी, और धीरे-धीरे दोनों के बीच प्रेम संबंध गहरा होता गया। और हम दोनों शादी तक भी कर लिया इसी रिश्ते के भरोसे रीता ने दो लड़की को जन्म दिया। लेकिन अब उसका जीवन संघर्षों से घिर गया है।
- रीता का आरोप है कि अरविन्द और उसके परिवार वाले उसे अपने घर में रखने से लगातार इंकार कर रहे हैं। वह कहती है कि ससुराल पक्ष द्वारा उसके साथ लड़की को जन्म दी हो जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया जाता है और इसी भेदभाव के कारण उसे स्वीकार नहीं किया जा रहा। रीता का दावा है कि चमार और चमईन जैसे अपमानजनक शब्द कहकर उसे और उसके बच्चों को सामाजिक रूप से नीचा दिखाया जाता है। यह भी बोला जाता है की अगर थाने मे तुम एक लाख दोगी तो हम थाने को दो लाख देंगे तुम्हरा पीछा कोई नहीं लेगा। रीता कई बार पंचायत व स्थानीय थाना में गुहार लगा चुकी है, लेकिन अब तक उसे न्याय नहीं मिल सका है। दो छोटे बच्चों के साथ उसका जीवन बेहद कठिन हो गया है।रीता अब प्रशासन से यह मांग कर रही है कि उसकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की जाए और उसे उसके बच्चों के भविष्य के लिए न्याय दिलाया जाए। यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक एक महिला अपने हक के लिए भटकती रहेगी।

