Election Commission SIR In Bengal: बिहार में सफलता के बाद चुनाव आयोग 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू कर दी है. नए चरण में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुद्दुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं. इसमें लगभग 51 करोड़ मतदाताओं का एसआईआर होगा. पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर पर अभी से राजनीतिक बवाल शुरू होने लगा है. वहीं, कई वोटर्स भी चिंतित होने लगे हैं कि अलग वे 2003 की वोटर लिस्ट का प्रमाण नहीं दे पाते हैं या फिर बीएलओ उनके घर जाता है और वे वहां नहीं मिलते हैं तो क्या उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया जाएगा? क्या वे आगामी विधानसभा चुनाव में वोट देने से वंचित हो जाएंगे? बताते चलें कि लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. क्यों नाम काटना इतना आसान नहीं है. बीएलओ आपके घर तीन बार जाएगा और तीनों बार आप उसे नहीं मिलते हैं तो भी आपका नाम नहीं कटेगा, बस एक प्रक्रिया फॉलो करनी होगी.
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले निर्वाचन आयोग ने वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाने के लिए विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान शुरू किया है. चूंकि, ये प्रक्रिया दो दशक के बाद हो रही है, तो लोगों का नाम काटे जाने का डर सताने लगा है. लेकिन, वोटर लिस्ट से नाम काटना आसान प्रक्रिया नहीं है. क्योंकि, नाम काटने के लिए कई चरणों की प्रक्रिया होगी. अगर आप किसी भी एक प्रक्रिया में मौजूद हो जाते हैं या फिर बीएलओ से संपर्क करते हैं या फिर ईसीआई के ऑनलान बेवसाइट पर क्वेरी रेज करते हैं, तो आपका नाम वोटर लिस्ट से नहीं काटा जाएगा. हालांकि, बंगाल में 15 नवंबर तक 7.66 करोड़ वोटरों में से करीब 25 लाख लोगों को उनके पते पर न मिलने की वजह से फॉर्म वितरित नहीं हो सके हैं. तो क्या इनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया जाएगा? जी नहीं. आपका नाम नहीं कटेगा.
बंगाल में क्या हो रहा है?
चुनाव आयोग ने मतदाताओं का पता लगाने के लिए, बीएलओ मतदाता पहचान पत्र (एपीक) नंबर का उपयोग कर रहे हैं. इससे लिंक किए गए मोबाइल नंबर पर मतदाताओं को कॉल किया जा रहा है. एक बीएलओ ने कहा, ‘हालांकि यह हमें दिए गए निर्देशों के अनुसार नहीं है, फिर भी हम मतदाताओं का पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं. ज्यादातर मामलों में, फ़ोन नंबर उपलब्ध नहीं होता है. अगर होता भी है, तो व्यक्ति बहुत सहयोग नहीं करता. वापस कॉल करने का वादा करता है, लेकिन कभी करता नहीं है.’ इसकी वजह से हमें वेरिफिकेशन और फॉर्म वितरित नहीं कर पाते हैं.
ये है प्रक्रिया-
यदि किसी मतदाता के ईपीआईसी पर पता गलत है और बीएलओ उस व्यक्ति को यात्रा के दौरान नहीं ढूंढ पाता है, तो प्रक्रिया इसी क्रम में आगे बढ़ती है.
- सबसे पहले, बीएलओ मतदाता को अनुपस्थित या अनुपस्थित के रूप में दर्ज करता है. इससे उसका नाम नहीं काटा जाता है. यह केवल वेरिफिकेशन के अगले चरण के लिए इंट्री करता है. इसके बाद, पर्यवेक्षक और सेक्टर मजिस्ट्रेट बीएलओ की रिपोर्ट की समीक्षा करते हैं.
- दूसरे स्तर की जांच के लिए बीएलओ फिर से मतदाताओं के पते पर वेरिफिकेशन के लिए जातें हैं. अगर उनका पता नहीं चलता है, तो उसका नाम ‘अनुपस्थित/अनुपस्थित’ सूची के मसौदे में डाल दिया जाता है.
- इसके बाद, उनका नाम मतदान केंद्र, बीएलओ के बूथ-स्तरीय ऑफिस और अन्य दिए गए स्थानों पर उनके नाम का लिस्ट प्रदर्शित करेगा, जो कि एसआईआर प्रक्रिया का ही एक भाग है.
क्या करना होगा?
चुनाव आयोग द्वारा आपत्ति और दावे आमंत्रित किया जाता है. फिर एक नोटिस भी जारी किया जाता है. यदि मतदाता सूची में अपना नाम देखते हैं या नोटिस के माध्यम से इसके बारे में जानते हैं, तो वे वैध प्रमाण के साथ फॉर्म 6 (जोड़ने के लिए) या फॉर्म 8 (पता सुधारने के लिए) दाखिल कर सकते हैं. आपत्ति अवधि बीत जाने और कोई दावा दायर न होने के बाद ही, अंतिम सूची में से आपका नाम हटाया जा सकता है.
नाम कट जाए तो क्या करें
अगर नाम कट जाए, तो घबराएं नहीं. कानून आपको तीन अपील के मौके देता है. आप फॉर्म 6 (नया नाम जोड़ने के लिए), फॉर्म 7 (डिलीट करने के लिए) या फॉर्म 8 (सुधार के लिए) भरकर स्थानीय निर्वाचन रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के पास आवेदन कर सकते हैं. अपील की समय सीमा ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के 7 दिनों के अंदर है. अंतिम लिस्ट 7 फरवरी 2026 को आएगी. नाम चेक करने के लिए CEO वेस्ट बंगाल वेबसाइट (ceowestbengal.com) पर जाएं और अपना जिला, विधानसभा क्षेत्र और EPIC नंबर डालें. अगर मैच न हो, तो 2002 की पुरानी लिस्ट से अपने या माता-पिता/दादा-दादी के नाम से लिंक करें.

