महाजन फील्ड फायरिंग रेंज, बीकानेर — थार रेगिस्तान की तपती रेत, तेज़ हवाएँ और बदलता मौसम… इसी चुनौतीपूर्ण माहौल में भारतीय सेना की सप्त शक्ति कमांड ने अपना बड़ा युद्धाभ्यास पूरा किया. रणबंकुरा डिविजन ने महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में तेज़, हाई-टेम्पो और वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपनी तैयारी का प्रदर्शन किया. टैंक की गर्जना, तोपों की गूंज, पैदल सेना की तेज़ मूवमेंट और अलग-अलग हथियारों की तालमेल ने दिखा दिया कि भारतीय सेना रेगिस्तान वाले सेक्टर में हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है.
इस अभ्यास को सिर्फ़ एक सामान्य ट्रेनिंग नहीं कहा जा सकता. यह एक ऐसा ऑपरेशन था जिसमें हर सेकंड, हर आदेश और हर मूवमेंट का महत्व था. सेना की आधुनिक सोच, बेहतर कोऑर्डिनेशन और प्रोफेशनलिज़म साफ दिखा, खासकर जब अलग-अलग यूनिट्स ने एकसाथ मिलकर मल्टी-डोमेन ऑपरेशन को अंजाम दिया.
Source: Ministry of Defence
रेगिस्तान में रियल वॉर जैसी तैयारी
महाजन रेंज की कठिन ज़मीन पर यह अभ्यास सेना की वास्तविक युद्ध जैसी चुनौतियों में काम करने की क्षमता को परखने के लिए किया गया. तेज़ गर्मी, रेत के तूफ़ान और बदलते हालात के बीच सैनिकों ने बेहतरीन तालमेल के साथ ऑपरेशन चलाया. सप्त शक्ति कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजीत सिंह ने खुद मैदान में उतरकर इस अभ्यास की समीक्षा की. उन्होंने ध्यान से देखा कि कैसे टैंक, मैकनाइज़्ड इन्फैंट्री, आर्टिलरी और एयर डिफेंस यूनिट्स एकसाथ मिलकर ऑपरेशन अंजाम दे रहे हैं.
उनके मुताबिक इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य था—टैक्टिकल प्रक्रियाओं को सुधारना, सभी हथियारों के बीच तालमेल बढ़ाना और कमांडरों की निर्णय क्षमता को और मजबूत करना.
कंबाइंड आर्म्स—एक साथ चलती हर ताकत
अभ्यास में पैदल सेना की कार्रवाई, टैंकों की तेजी, तोपों की फायर सपोर्ट, एयर डिफेंस की तैनाती, इंजीनियरिंग सपोर्ट और लॉजिस्टिक सप्लाई—सबकुछ एकसाथ चलता दिखा. यही आज की आधुनिक लड़ाई की जरूरत है. UAV यानी ड्रोन से मिलने वाली लाइव जानकारी को भी युद्ध मैदान में बड़ी भूमिका दी गई, जिससे लक्ष्य पहचान और कमांडरों का निर्णय लेना आसान हुआ.
ड्रोन का नया युग: अशनि प्लाटून
इस अभ्यास की खास बात रही अशनि प्लाटून—सेना की ड्रोन यूनिट्स. रेत के बीच जहां दृश्यता कम हो जाती है, वहां ड्रोन ने दुश्मन की मूवमेंट, लोकेशन और गतिविधियों की तुरंत जानकारी दी. यह जानकारी सीधे कमांड पोस्ट तक पहुंचाई गई और उसी के आधार पर अगला कदम तय किया गया. इससे सेना की प्रतिक्रिया और भी तेज़ हो गई.
तेजी से बदलते युद्ध का सिमुलेशन
अभ्यास में ऐसा माहौल बनाया गया जिसमें हालात हर पल बदलते रहें—कभी आक्रामक ऑपरेशन, कभी रक्षात्मक, कभी टार्गेट बदलना, कभी यूनिट्स की नई पोज़िशनिंग. सैनिकों और कमांडरों की मानसिक और शारीरिक दोनों क्षमताओं की कड़ी परीक्षा हुई. आज के समय में युद्ध सिर्फ हथियारों का नहीं, बल्कि तेज़ फैसलों और सही रणनीति का होता है—और इस अभ्यास में उसी कौशल की कसौटी पर सैनिक खरे उतरे.
सैनिकों का जज़्बा और अनुशासन
पूरे अभ्यास में सैनिकों ने उच्च स्तर का अनुशासन, धैर्य और संकल्प दिखाया. कठिन हालात में भी उनकी एकाग्रता और ऑपरेशनल सटीकता देखने लायक रही. आर्मी कमांडर ने सैनिकों की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी प्रतिबद्धता भारतीय सेना की असली ताकत है.
लॉजिस्टिक्स—जो दिखता नहीं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण
ईंधन की सप्लाई, पानी-खाद्य सामग्री, वाहन रिकवरी, रिपेयर—ये सब चुपचाप चलने वाली लेकिन ऑपरेशन की रीढ़ हैं. इस अभ्यास ने दिखाया कि भारतीय सेना की लॉजिस्टिक्स टीम कितनी मजबूत है और कैसे वह लंबी अवधि तक हाई-इंटेंसिटी ऑपरेशन को सपोर्ट कर सकती है.
नई चुनौतियों के लिए तैयार भारतीय सेना
इस बड़े अभ्यास ने साफ कर दिया है कि सप्त शक्ति कमांड रेगिस्तान के मोर्चे पर किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. आधुनिक तकनीक, ड्रोन आधारित इंटेलिजेन्स, तेज़ निर्णय क्षमता और संयुक्त ऑपरेशन—इन सबके मेल से भारतीय सेना एक भविष्य-ready फोर्स बन चुकी है. यह अभ्यास आने वाले समय में नई सैन्य रणनीतियों को आकार देगा और भारत की रक्षा तैयारी को और मजबूत करेगा.

